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सूर्य ग्रहण 9 मार्च 2016

9 मार्च की सुबह इस प्रकार की ग्रह स्थिति रहेंगी सूर्य ग्रहण के समय कुंभ लग्न उदय होगा और लग्न में केतु चंद्रमा सूर्य शुक्र एवं बुध ग्रह होंगे सप्तम स्थान सिंह राशि में राहु और गुरु की युति होगी दशम स्थान में वृश्चिक राशि में मंगल एवं शनि की युति रहेगी कुल मिलाकर यह स्थिति या ग्रहण के हिसाब से अनुकूल नहीं है यह देश हित में भी नहीं है इस प्रकार के ग्रह संयोग से देश में बड़ी दुर्घटना आतंकी घटना एवं प्राकृतिक आपदा को दर्शाती है। इस प्रकार की ग्रह स्थिति कुंभ राशि एवम सिंह राशि वाले जातकों के लिए अत्यंत ही कष्टकारक साबित होती है इन राशि वालों को ग्रहण की स्थिति में विशेष रूप से सावधानी बरतना चाहिए।
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर 9 मार्च को 320 साल बाद कुंभ राशि पर पंचग्रही योग में सूर्य ग्रहण ज्योतिष के अनुसार सिंहस्थ से पहले पंचग्रही योग में सूर्य ग्रहण शुभ फलदायी नहीं है। खंड ग्रास सूर्य ग्रहण फाल्गुन अमावस्या बुधवार 9 मार्च के दिन पड़ेगा। पश्चिमोत्तर भाग को छोड़ कर पूरे देश में दिखाई देगा। इस ग्रहण का सूतक 8 मार्च को शाम 5.00 बजे से प्रारंभ होकर ग्रहण के मोक्ष के बाद समाप्त होगा। सूर्य ग्रहण का स्पर्श 9 मार्च को सुबह 5.34 बजे, मध्य 6.12 बजे तथा मोक्ष 6.46 बजे होगा।
ग्रहण का परम ग्रास 22 यह ग्रहण पूर्वा भाद्र पक्ष नक्षत्र में साध्य योग, कुंभ राशि में स्थित चंद्र के साथ घटित होगा। इस समय आकाश में  5 ग्रह केतु, बुध, सूर्य, शुक्र और चंद्र साथ रहेंगे। इन ग्रहों पर शनि-युत मंगल की दृष्टि भी है।
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर ग्रहण का होना शुभ नहीं माना जाता है। बुधवार का दिन, कुंभ राशि, पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र तथा पांच ग्रहों के साथ ग्रह गोचर में गुरु-राहु का समसप्तक दृष्टि संबंध अनिष्टकारी माना जाता है। यह योग 320 साल बाद बन रहा है।
सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य भारी मात्रा में उर्जा को उत्सर्जित करता है जिसे हमारी नग्न आँखें सहन नहीं कर सकती हैं। इस दौरान पराबैंगनी किरणें भी निकलती हैं। कई शोधों से इस बात की पुष्टि भी हुई है कि नग्न आँखों से  सूर्य ग्रहण देखने से रेटिना ख़राब हो सकता है। ग्रहण के दौरान पकाया या खाया गया खाना हानिकारक होता है। भारतीय परंपरा के अनुसार सूर्य ग्रहण से 10 घंटे पहले से ही लोग उपवास रखते हैं।शास्त्रों के मुताबिक़ ग्रहण के दौरान की गई साधना का परिणाम कई गुना अधिक मिलता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य की किरणें गर्भ में पल रहे भ्रूण पर ग़लत प्रभाव डाल सकती हैं।

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