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वसंत पंचमी-2017

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन सरस्वती पूजा करने का विशेष मह्त्व है. इस वर्ष यह पर्व 1 फरवरी, 2017 में मनाया जायेगा. बसन्त पंचमी के दिन भगवान श्रीविष्णु, श्री कृ्ष्ण-राधा व शिक्षा की देवी माता सरस्वती की पूजा पीले फूल, गुलाल, अर्ध्य, धूप, दीप, आदि द्वारा की जा जाती है. पूजा में पीले व मीठे चावल व पीले हलुवे का श्रद्धा से भोग लगाकर, स्वयं इनका सेवन करने की परम्परा है. ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से देखे तो कुण्डली का पंचम भाव शिक्षा भाव कहलाता है. पंचमी तिथि से शिक्षा प्रारम्भ करना शिक्षा क्षेत्र में सफलता की नई दिशाएं खोलता है. माता सरस्वती बुद्धि और ज्ञान की देवी है. मां की कृ्पा से जीवन में चेतना का सृ्जन होता है. और धन प्राप्ति में ज्ञान की भूमिका दिन प्रतिदिन बढती जा रही है.

 

बसंत पंचमी के लिए इमेज परिणाम

पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:15 से 11:52

वसंत पंचमी तिथि के दिन माता सरस्वती का जन्म हुआ, इसलिये बसंत पंचमी का दिन विद्धा जयंती के नाम से भी जाना जाता है. देश के सभी शिक्षण संस्थानों में इसे एक महोत्सव के रुप में मनाया जाता है. माता का अभिवादन कर उन्हें धन्यवाद किया जाता है. मां सरस्वती की पूजा- अर्चना-वंदन करने से बुद्धि की जडता का नाश होता है. और ज्ञान की ज्योति प्रजवल्लित होती है. माता सरस्वती के हाथों में पुस्तक ज्ञान की देवी होने का संकेत देती है. हमारा देश प्राचीन काल से ही ज्ञानियों का देश रहा है. शारीरिक व बोद्धिक उन्नति को यहां विशेष महत्व दिया जाता है.

विद्धा आरम्भ शुभ मुहूर्त वसंत पंचमी 

वसंत पंचमी का दिन शिक्षा की देवी माता सरस्वती का जन्म उत्सव होने के साथ साथ इस दिन को अबूझ मुहूर्त के नाम से भी जाना जाता है. बसंत पंचमी के दिन विधा प्रारम्भ करना विशेष रुप से शुभ माना जाता है

माता शारदा न केवल विधा और ज्ञान की देवी है, उन्हें कला और संगीत की देवी होने का भी सम्मान प्राप्त है. किसी भी कला और संगीत कि शिक्षा प्रारम्भ करने से पूर्व माता सरस्वती का पूजन करना शुभ होता है. जो छात्र मेहनत के साथ माता सरस्वती की आराधना करते है. उन्हें ज्ञान के साथ साथ सम्मान की प्राप्ति भी होती है

बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्तों में शामिल किया जाता है. बसंत पंचमी के दिन शुभ कार्य जिसमें विवाह, भवन निर्माण, कूप निर्माण, फैक्ट्री आदि का शुभारम्भ, शिक्षा संस्थाओं का उद्धघाटन करने के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता है.

परीक्षा में सफलता के लिए

ॐ नमः श्रीं श्रीं अहं वद वद वाग्वादिनी भगवती सरस्वत्यै नमः स्वाहा विद्यां देहि मम ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।

विघ्नों को दूर करने के लिए

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वाहा।

स्मरण शक्ति बढा के लिए
ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा।

 

प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हेतु उपरोक्त मंत्रों के अलावे अपनी कुंडली के पंचम स्थान के अनुसार मंत्रों का जाप करना चाहिए।

सरस्वती पूजा पंचमी के दिन होने एवं पंचम भाव से संबंधित होने के कारण विद्यार्थियों एवं परीक्षार्थियों जो कि किसी कंपटीशन एवं प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं ।

किसी ज्योतिषी से अपनी कुंडली के पंचम स्थान को दिखा ले एवं पंचम स्थान में उपस्थित ग्रह यदि पंचम भाव में कोई ग्रह नहीं है तो पंचम भाव के स्वामी ग्रह का सरस्वती पूजा

के दिन जाप करना काफी फलदाई रहता है पंचम भाव में स्थित ग्रह या पंचम भाव के स्वामी ग्रह का 11000 आप स्वयं करें या किसी ब्राह्मण से सरस्वती पूजा के दिन जाप

करवाने से कंपटीशन एवं परीक्षा में मनचाही सफलता मिलती है।

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