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सरस्वती पूजा विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन

माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है। सरस्वती पूजा का महत्व और सरस्वती पूजा क्यों मनाई जाती है उसके बारे में बता रहे हैं।इस साल सरस्वती पूजा रविवार को 10 फरवरी को मनाई जाएगी

देवी सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं। सृष्टि की रचना के लिए देवी शक्ति में अपने आप को पांच भागों में विभक्त कर लिया। वे देवी राधा, पार्वती, सावित्री, दुर्गा और सरस्वती के रूप में भगवान श्री कृष्ण के विभिन्न अंगों से प्रकट हुईं। उस समय श्री कृष्ण के कंठ से उत्पन्न हुए देवी को सरस्वती के नाम से जाना जाने लगा। देवी सरस्वती के अनेक नाम हैं। जिनमें से वाक्, वाणी, गी, गिरा, बाधा, शारदा, वाचा, श्रीश्वरी, वागीश्वरी, ब्राह्मी, गौ, सोमलता, वाग्देवी और वाग्देवता आदि प्रसिद्ध नाम है।

सफ़ेद वस्तुओं का प्रयोग करें

माघ शुक्ल पंचमी को अनध्याय भी कहा जाता है। देवी सरस्वती की उत्पत्ति सत्वगुण से हुई है। इनकी पूजा-आराधना में हमेशा श्वेत वर्ण की वस्तुओं का ही प्रयोग किया जाता है। जैसे – दूध, दही, मक्खन, सफ़ेद तिल के लड्डू, गन्ना या गन्ने का रस, पका हुआ गुड़, मधु, श्वेत चन्दन, श्वेत पुष्प, श्वेत परिधान, श्वेत अलंकार, खोए का श्वेत मिष्ठान, अदरक, मूली, शर्करा, सफ़ेद धान के अक्षत, तण्डुल, शुक्ल मोदक, पके हुए केले की फली का पिष्टक, नारियल, नारियल जल, श्रीफल, बदरीफल, पुष्प फल आदि।

मान्यता है कि जिस छात्र पर मां सरस्वती की कृपा हो उसकी बुद्धि बाकी छात्रों से अलग और बहुत ही प्रखर होती है। ऐसे छात्र को कोई भी विद्या आसानी से प्राप्त हो जाती है। खासतौर पर बसंत पंचमी में दिन यदि कोई छात्र मां सरस्वती की अराधना करे उनके मंत्र का जाप करें या कोई अन्य उपाय करें तो मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पूजन के समय अबूझ नक्षत्र का भी संयोग बना है। माता का पूजन का सबसे शुभ मुहुर्त प्रातः 6.30 बजे से शाम 03:54 बजे तक है।

जिन छात्रों की कुंडली में पंचम स्थान में जो ग्रह बैठे हो उस दिन अर्थात सरस्वती पूजा के दिन इन ग्रहों का दान करना शुभ रहता है और पंचम भाव में स्थित ग्रह का जाप करना भी काफी उपयोगी माना गया है क्योंकि ज्योतिष के अनुसार पंचम भाव बुद्धि का विकास का उच्च शिक्षा का होता है यदि पंचम भाव में कोई ग्रह न बैठा हो तो पंचम भाव के स्वामी ग्रह जो भी हो सरस्वती पूजा के दिन इस मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना एवं इस ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करना काफी लाभकारी माना गया हुआ है

राशि के अनुसार करे मां सरस्वती की आराधना

मेष- सिंदूर, लाल फूल, गुलाबी अबीर अर्पण करे I मंत्र- ॐ वाग्देवी वागीश्वरी नमः

वृष – हरे रंग की कलम, पीला फूल चढ़ाए I मंत्र – ॐ कौमुदी ज्ञानदायनी नमः

मिथुन- श्वेत रंग की कलम, अपराजिता पुष्प, नारियल अर्पण करे I मंत्र – ॐ मां भुवनेश्वरी सरस्वत्यै नमः

कर्क – लाल कलम, इत्र, अभ्रक चढ़ाए I मंत्र – ॐ मां चंद्रिका देव्यै नमः

सिंह- पीले रंग की कलम, लाल फूल, अभ्रक अर्पित करे I मंत्र- ॐ मां कमलहास विकासिनि नमः

कन्या- गुड़, अबीर, इत्र अर्पण तथा पुस्तक का दान करे I मंत्र- ॐ मां प्रणवनाद विकासिनि नमः

तुला- नीला कलम, पंचामृत, गुलाबी अबीर, इत्र चढ़ाए I मंत्र- ॐ मां हंसुवाहिनी नमः

वृश्चिक- सफेद रेशमी वस्त्र, ऋतुफल, गंगाजल अर्पित करे I मंत्र -ॐ शारदे दैव्यै चन्द्रकान्ति नमः

धनु- श्वेत चंदन, अबीर, पीला फूल चढ़ाए I मंत्र- ॐ जगती वीणावादिनी नमः

मकर- अरबा चावल, दही, पुष्प माला, शहद अर्पण करे I मंत्र- ॐ बुद्धिदात्री सुधामूर्ति नमः

कुंभ- खीर, पीला अबीर, इत्र चढ़ाए I मंत्र- ॐ ज्ञानप्रकाशिनी ब्रह्मचारिणी नमः

मीन- सफेद वस्त्र, पीला फूल, घी अर्पित करे I मंत्र- ॐ वरदायिनी मां भारती नमः

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