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हरितालिका तीज: सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हरतालिका तीज भाद्रपद यानी कि भादो माह की शुक् पक्ष तृतीया को मनाई जाती है. यह तीज भादो माह की गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले आती है. ग्रेगारियन कैलेंडर के अनुसार हरतालिका तीज हर साल अगस् या सितंबर के महीने में पड़ती है. इस बार हरतालिका तीज की तिथि को लेकर काफी असमंजस है.हरतालिका तीज पर्व कथा : इन तीन दिनों में माता पार्वती का पूजन करके, अविवाहित लड़कियां भगवान् शिव जैसा पति पाने की प्रार्थना करती हैं। विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख के लिए उनसे प्रार्थना करती हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती शिव से प्यार करती थीं। हालांकि तपस्या में लीन होने के कारण शिव को उसके बारे में पता नहीं था।

माता पार्वती ने कई वर्षों तक हिमालय पर तपस्या की और भगववान शिव ने आखिरकार उन्हें देखा। माँ पार्वती के प्यार और भक्ति के भाव को समझते हुए, भगवान् शंकर उनसे शादी करने के लिए तैयार हो गए। तब से माता पार्वती की पूजा हरतालिका तीज के रूप में की जाती है।

हरतालिका तीज व्रत विधि एवं प्रक्रिया : महिलाएं और युवा लड़कियां इन तीन दिनों में पानी रहित (निर्जला) उपवास करती हैं, और तीनों रातों में जागती रहती हैं। यह तपस्या का प्रतीक है जिसके द्वारा माता पार्वती ने भगवान् शिव को अपने पति रूप में प्राप्त करने का प्रयास किया था। जो भक्त इस व्रत को रखते है ब्राह्मणों और युवा लड़कियों को भोजन प्रशाद देते हैं।सितंबर को सुबहसुबह करनी होगी तीज की पूजा
सभी जानकार अपनेअपने मत दे रहे हैं। ऐसे में महिलाएं एक और 2 सितंबर, दोनों में से किसी भी दिन तीज व्रत कर सकती हैं। बात शुभ मुहूर्त की करें तो जानकारों के अनुसार एक सितंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6.42 बजे से रात 9.03 बजे तक का होगा। वहीं, 2 सितंबर को अगर आप तीज मनाना चाहती हैं तो इस बार सुबहसुबह ही 2 बजे से पहले इसकी पूजा कर लेनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके बाद चतुर्थी का योग शुरू हो जाएगा

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