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गणेश चतुर्थी: विघ्नहर्ता एवं बुद्धि के दाता

कब से कब तक मनाया जाता है गणेशोत्सव

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेश जी का उत्सव गणपति प्रतिमा की स्थापना कर उनकी पूजा से आरंभ होता है और लगातार दस दिनों तक घर में रखकर अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की विदाई की जाती है। इस दिन ढोल नगाड़े बजाते हुए, नाचते गाते हुए गणेश प्रतिमा को विसर्जन के लिये ले जाया जाता है। विसर्जन के साथ ही गणेशोत्सव की समाप्ति होती है।

कैसे करें गणेश प्रतिमा की स्थापना व पूजा

गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है। यह प्रतिमा सोने, तांबे, मिट्टी या गाय के गोबर से अपने सामर्थ्य के अनुसार बनाई जा सकती है। इसके पश्चात एक कोरा कलश लेकर उसमें जल भरकर उसे कोरे कपड़े से बांधा जाता है। तत्पश्चात इस पर गणेश प्रतिमा की स्थापना की जाती है। इसके बाद प्रतिमा पर सिंदूर चढ़ाकर षोडशोपचार कर उसका पूजन किया जाता है। गणेश जी को दक्षिणा अर्पित कर उन्हें 21 लड्डूओं का भोग लगाया जाता है। गणेश प्रतिमा के पास पांच लड्डू रखकर बाकि ब्राह्मणों में बांट दिये जाते हैं। गणेश जी की पूजा सांय के समय करनी चाहिये। पूजा के पश्चात दृष्टि नीची रखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिये। इसके पश्चात ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उन्हें दक्षिणा भी दी जाती है।

लग्नानुसार गणेश स्थापना मुहूर्त 

सिंह लग्न- प्रात: 5.03 से 07.12 तक।

कन्या लग्न- सुबह 7.12 से 9.16 तक।

धनु लग्न- दोपहर 1.47 से 3.53 तक।

कुंभ लग्न- शाम 5.40 से 7.09 तक।

मेष लग्न- रात्रि 8.43 से 10.24 तक।

विशेष- अभिजीत योग दोपहर 12.01 से 12.50 तक।

  • गणेश चतुर्थी 2019
  • 2 सितंबर
  • मध्याह्न गणेश पूजा – 11:05 से 13:36
  • चंद्र दर्शन से बचने का समय- 08:55 से 21:05 (2 सितंबर 2019)
  • चतुर्थी तिथि आरंभ- 04:56 (2 सितंबर 2019)
  • चतुर्थी तिथि समाप्त- 01:53 (3 सितंबर 2019)

 

 

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