Article

दिवाली: घर में जितने भी रत्न ,गहने एवं आभूषण हो उसकी भी गंगाजल से धोकर शुद्धीकरण करें एवं पूजन के बाद उसको लॉकर में रखे..

सभी मित्रों एवं पाठकों को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं

इस वर्ष कार्तिक अमावस्या का संयोग दो दिन हो रहा है. 27 अक्टूबर को रविवार के दिन दोपहर 12:13 से अमावस्या का आरंभ होगा. इस समय पर अमावस मध्याह्न, अपराह्न, सांय काल, प्रदोष काल, निशिथकाल, महा निशिथकाल से युक्त होगी. इसलिए 27 अक्टूबर 2019 को ही दीपावली पूजन किया जाना संपन्न होगा. 28 अक्टूबर सोमवार के दिन अमावस तिथि प्रात:काल 09:09 पर ही समाप्त हो जाएगी और इसके बाद प्रतिपदा का आरंभ होगा जो रात्रि समय तक व्याप्त रहेगा इस समय पर अन्नकूट पूजन और गोवर्धन पूजा का पर्व इस दिन मनाना श्रेयस्कर होगा.

दिवाली के दिन लक्ष्मी का पूजा का विशेष महत्व माना गया है, इसलिए यदि इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए तब लक्ष्मी व्यक्ति के पास ही निवास करती है. “ब्रह्मपुराण” के अनुसार आधी रात तक रहने वाली अमावस्या तिथि ही महालक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ होती है. यदि अमावस्या आधी रात तक नहीं होती है तब प्रदोष व्यापिनी तिथि लेनी चाहिए. लक्ष्मी पूजा व दीप दानादि के लिए प्रदोषकाल ही विशेष शुभ माने गए हैं.

27 अक्टूबर 2019 के रात्रि में 22:52 से 25:28 मिनट तक महानिशीथ काल रहेगा. इस समय के दौरान रोग और काल की चौघडियां अनुकूल नहीं हैं. लेकिन 22:51 से 25:14 तक के समय में कर्क लग्न और सिंह लग्न होना शुभस्थ है. इसलिए उक्त चौघडियों को भुलाकर यदि कोई कार्य प्रदोष काल अथवा निशिथकल में शुरु करके इस महानिशीथ काल में संपन्न हो रहा हो तो भी वह अनुकूल ही माना जाता है. महानिशिथ काल में पूजा समय चर लग्न में कर्क लग्न उसके बाद स्थिर लग्न सिंह लग्न भी हों, तो विशेष शुभ माना जाता है. महानिशीथ काल में कर्क लग्न और सिंह लग्न होने के कारण यह समय शुभ हो गया है. जो शास्त्रों के अनुसार दिपावली पूजन करना चाहते हो, वह इस समयावधि को पूजा के लिये प्रयोग कर सकते हैं.

दिवाली पूजन के शुभ मुहूर्त एवं लग्न:-

वृश्चिक लग्न – यह दिवाली के दिन की सुबह का समय होता है. वृश्चिक लग्न में मंदिर, हॉस्पिटल, होटल्स, स्कूल, कॉलेज में पूजा होती है. राजनैतिक, टीवी फ़िल्मी कलाकार वृश्चिक लग्न में ही लक्ष्मी पूजा करते है.
कुम्भ लग्न – यह दिवाली के दिन दोपहर का समय होता है. कुम्भ लग्न में वे लोग पूजा करते है, जो बीमार होते है, जिन पर शनि की दशा ख़राब चल रही होती है, जिनको व्यापार में बड़ी हानि होती है.
वृषभ लग्न – यह दिवाली के दिन शाम का समय होता है. यह लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय होता है.
सिम्हा लग्न – यह दिवाली की मध्य रात्रि का समय होता है. संत, तांत्रिक लोग इस दौरान लक्ष्मी पूजा करते है.
प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उतम रहता है. इस दिन 18:42 से 20:37 के दौरान वृष लग्न रहेगा. प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों रहने से मुहुर्त शुभ रहेगा.
निशिथ काल में 17:40 से 19:18 तक की शुभ उसके बाद अमृत की चौघडिया रहेगी, ऎसे में व्यापारियों वर्ग के लिये लक्ष्मी पूजन के लिये इस समय की अनुकूलता रहेगी.
27 अक्टूबर की रात्रि में 22:50 से 01:14 तक के समय में कर्क लग्न और सिंह लग्न होना शुभस्थ है….

दिवाली के अवसर पर पूजन सामग्री में निम्न वस्तुओं का सेवन करने से सालों भर व्यवसाय एवं रोजगार ने एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती है कमल गट्टा की माला से पूजा करनी चाहिए एवं हवन में भी कमलगट्टे का उपयोग करना चाहिए कपूर, सरसों, कमल पुष्प, लक्ष्मी मंत्र, पीला वस्त्र, हल्दी, कौड़ी, गोमती चक्र, शंख, धान, अबीर, गेरुआ, स्फटिक माला, मोती की माला… घर में जितने भी रत्न ,गहने एवं आभूषण हो उसकी भी गंगाजल से धोकर शुद्धीकरण करें एवं पूजन के बाद उसको लॉकर में रखे..

दिवाली पूजन में इत्र का भी काफी महत्व होता है साथ-साथ धूप, दीप, हवन भी करनी चाहिए….

Leave a Reply

10 + 7 =